IDHAR ZINDAGI KA JANAZA UTHEGA ORIGINAL BY ATTAULLAH KHAN

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Idhar zindagi ka janaza uthega

Udhar zindagi unki dulhan banegi…

Jawani pe meri sitam dhane walon, Jara soch lo kya kahega zamana

Idhar mere armaan kafan pehan lenge, Udhar unke hathon mein mehandi sajegi…

Wo parde ke piche, Mai parde ke aage, Na wo ayein aage, Na mai jaun piche

Wo aage badhenge to kuch bhi na hoga, Mai piche hatunga to duniya hasegi…

Azal se mohabbat ki dushman hai duniya, Kahin do dilon ko milne na degi

Idhar mere dil par khanjar chalega, Udhar unke mathe pe bindiya sajegi…

Abhi unke hansne ke din hain wo hans lein, Abhi mere rone ke din hain main ro lun

Magar ek din unko rona padega, Ke jis bhi meri maiyyat uthegi…

Idhar zindagi ka janaza uthega, Udhar zindagi unki dulhan banegi

Qayamat se pehle, Qayamat hai yaron, Mere samne meri duniya lutegi…

Attaullah Khan Essakhelvi

इधर ज़िंदगी का जनाज़ा उठेगा

उधर ज़िंदगी उनकी दुल्हन बनेगी…

जवानी पे मेरी सितम ढाने वालों, ज़रा सोच लो क्या कहेगा ज़माना

इधर मेरे अरमाँ कफ़न पहन लेंगे, उधर उनके हाथों में मेहँदी सजेगी…

वो परदे के पीछे, मैं परदे के आगे, ना वो आएँ आगे, ना मैं जाऊँ पीछे

वो आगे बढ़ेंगे तो कुछ भी ना होगा, मैं पीछे हटूँगा तो दुनिया हँसेगी…

अजल से मोहब्बत की दुश्मन है दुनिया, कहीं दो दिलों को मिलने ना देगी

इधर मेरे दिल पर ख़ंजर चलेगा, उधर उनके माथे पे बिंदिया सजेगी…

अभी उनके हँसने के दिन हैं वो हँस लें, अभी मेरे रोने के दिन हैं मैं रो लूँ

मगर एक दिन उनको रोना पड़ेगा, कि जिस दिन भी मेरी मय्यत उठेगी…

इधर ज़िंदगी का जनाज़ा उठेगा, उधर ज़िंदगी उनकी दुल्हन बनेगी

क़यामत से पहले, क़यामत है यारों, मेरे सामने मेरी दुनिया लुटेगी…

अत्ताउल्लाह खान

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