KUCH RANG HAI GUZRE LAMHON KA

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Kuch rang hai guzre lamhon ka

Kuch ashkon ki baratein hain

Kuch bhule- bisre chehre hain

Kuch yadon ki barsatein hain

Ye pichle ishq ki batein hain

Mohsin Naqvi

कुछ रंग है गुजरे लम्हों का

कुछ अश्कों की बारातें हैं

कुछ भूले-बिसरे चेहरे हैं

कुछ यादों की बरसातें हैं

ये पिछले इश्क़ की बातें हैं

मोहसिन नाक़वी

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