MUDDAT HUI THI HONTH HAMARE SILE HUE

Posted by

“Muddat hui thi honth hamare sile hue,

Kal sham wo mile to unhi se gile hue,

Wo keh rahe hain dard jo baksha hai zeest hai,

Jo zakhm de chuke hain wafa ke sile hue”

Song-Waqt rukhsat hai

“मुद्दत हुई थी होंठ हमारे सिले हुए,

कल शाम वो मिले तो उन्ही से गिले हुए,

वो कह रहे हैं दर्द जो बक्षा है ज़ीस्त है,

जो ज़ख़्म दे चुके हैं वफ़ा के सिले हुए”

गीत-वक़्त रुख़्सत है

Leave a Reply